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Muzaffarpur Hospital Fire: ICU में लगी भीषण आग ने उजाड़े कई परिवार, इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचे मरीजों पर टूटा कहर

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मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा स्थित एक निजी अस्पताल के ICU में लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया है। हादसे में कई मरीजों की मौत और अनेक लोगों के घायल होने की सूचना है। प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों ने घटना की भयावह तस्वीर बयां की।

मुजफ्फरपुर/आलम की खबर:मुजफ्फरपुर शहर के ब्रह्मपुरा क्षेत्र में स्थित एक निजी अस्पताल में गुरुवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया। अस्पताल के आईसीयू वार्ड में अचानक लगी आग ने कुछ ही मिनटों में भयावह रूप धारण कर लिया और वहां भर्ती मरीजों, उनके परिजनों तथा अस्पताल कर्मियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। घटना के बाद अस्पताल परिसर में चीख-पुकार, भागदौड़ और बेबसी का ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसे याद कर लोग अब भी सिहर उठ रहे हैं।

हादसे के बाद प्रशासन की ओर से कुछ मौतों की पुष्टि की गई है, जबकि स्थानीय स्तर पर मृतकों की संख्या अधिक होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। कई मरीजों को गंभीर स्थिति में दूसरे अस्पतालों में स्थानांतरित किया गया है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। इस घटना ने एक बार फिर अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था और आपदा प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग लगने की शुरुआत अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर स्थित आईसीयू से हुई। शुरुआती कुछ मिनटों में किसी को स्थिति की गंभीरता का अंदाजा नहीं था, लेकिन देखते ही देखते धुआं पूरे वार्ड में फैल गया। कई मरीज ऐसे थे जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और अपने बल पर बाहर निकलने की स्थिति में नहीं थे। धुएं के कारण सांस लेने में दिक्कत होने लगी और वार्ड के भीतर मौजूद लोगों में जान बचाने की होड़ मच गई।

इस दर्दनाक घटना ने कई परिवारों के सपनों को भी तोड़ दिया। अस्पताल में भर्ती एक बुजुर्ग मरीज के परिजनों ने बताया कि परिवार बेहतर इलाज की उम्मीद में यहां पहुंचा था। मरीज की चिकित्सा के लिए परिवार आर्थिक रूप से भी काफी संघर्ष कर रहा था। लेकिन अचानक हुए इस हादसे ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। परिजनों का कहना है कि उन्होंने अपने सामने ऐसी स्थिति देखी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

हादसे के दौरान मौजूद लोगों का कहना है कि वार्ड के भीतर धुआं तेजी से फैलने लगा था। मरीजों और उनके साथ आए लोगों ने बाहर निकलने के लिए हर संभव प्रयास किया। कुछ लोग दरवाजों की ओर भागे तो कुछ ने खिड़कियों के रास्ते निकलने की कोशिश की। कई मरीजों को उनके परिजन गोद में उठाकर या स्ट्रेचर के सहारे बाहर लाए। अस्पताल परिसर में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल था।

स्थानीय लोगों के अनुसार घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। चूंकि आग अस्पताल की ऊंची मंजिल पर लगी थी, इसलिए बचाव कार्य आसान नहीं था। दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर नियंत्रण पाया। इस दौरान पुलिस, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी राहत एवं बचाव कार्य में जुटी रहीं।

घटना के बाद अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। कई लोग अपने परिजनों की जानकारी पाने के लिए परेशान दिखाई दिए। कुछ लोगों को यह भी नहीं पता था कि उनके मरीज को किस अस्पताल में शिफ्ट किया गया है। प्रशासन को स्थिति संभालने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।

अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों और कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने सुरक्षा प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में पर्याप्त अग्निशमन व्यवस्था और आपातकालीन निकास व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम भी घटना के कारणों का पता लगाने में जुट गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीयू जैसे विभागों में आग लगने की घटनाएं बेहद खतरनाक होती हैं क्योंकि वहां ऑक्सीजन सपोर्ट और अन्य जीवनरक्षक उपकरणों का उपयोग होता है। ऐसे में छोटी सी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े हादसे का रूप ले सकती है। यही वजह है कि अस्पतालों में नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट और सुरक्षा उपकरणों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।

स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का कहना है कि केवल आधुनिक मशीनें और भवन पर्याप्त नहीं हैं। अस्पतालों में आपदा प्रबंधन की तैयारी, प्रशिक्षित स्टाफ और समय-समय पर होने वाली सुरक्षा जांच भी उतनी ही आवश्यक है। यदि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए तो इस तरह की घटनाओं में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

घटना के बाद जिला प्रशासन ने घायलों के समुचित उपचार और मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। अधिकारियों ने कहा है कि हादसे की निष्पक्ष जांच होगी और यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुजफ्फरपुर का यह हादसा केवल एक अस्पताल तक सीमित घटना नहीं है, बल्कि यह पूरे स्वास्थ्य तंत्र के लिए चेतावनी है। राज्य के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की समीक्षा करने की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

फिलहाल पूरे जिले में शोक का माहौल है। जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके लिए यह क्षति अपूरणीय है। वहीं घायल मरीजों के परिजन उनके शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना कर रहे हैं। लोगों की नजर अब जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जिससे इस हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सके.

मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि स्वास्थ्य संस्थानों में सुरक्षा व्यवस्था को केवल औपचारिकता नहीं माना जा सकता। अस्पताल वह स्थान है जहां मरीज जीवन बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। यदि वहां भी सुरक्षा मानकों में कमी हो तो परिणाम बेहद भयावह हो सकते हैं। सरकार और प्रशासन को राज्य के सभी अस्पतालों में व्यापक सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।

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